- नाम मोहम्मद फैसल मदनी
- पिता का नाम: इसलाहद्दीन
- आयु : 32 साल
- निवास स्थान: श्रीपुर डंगरा, चरैया, बायसी, पूर्णियां, बिहार
आज के दौर में जब इलाज कराना आम आदमी के लिए एक चुनौती बन चुका है, ऐसे में "लाइफलाइन हॉस्पिटल" के डायरेक्टर मोहम्मद फैसल मदनी साहब एक नई रोशनी की तरह उभर कर सामने आए हैं। उन्होंने गरीबों और जरूरतमंदों की भलाई के लिए यह हॉस्पिटल बनाया, ताकि हर इंसान को किफायती और बेहतरीन इलाज मिल सके।
👉 इल्म से खिदमत तक का सफर : मोहम्मद फैसल मदनी साहब की तालीम का सफर डंगरा से शुरु हुआ, जहां उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने सन 2013- 14 तब पढ़ाई की के बाद फिर सऊदी अरब के मदीना यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा हासिल की। लेकिन उनका मकसद सिर्फ इल्म हासिल करना नहीं था, बल्कि अपनी जानकारी और अनुभव का इस्तेमाल इंसानियत की खिदमत में लगाना था।
👉लाइफलाइन हॉस्पिटल की बुनियाद : 19 अगस्त 2021 को उन्होंने "लाइफलाइन हॉस्पिटल" की नींव रखी, जिसका मकसद था – एक ऐसा अस्पताल जहां मरीजों को हर जरूरी चिकित्सा सुविधा एक ही छत के नीचे मिले। अक्सर मरीजों को OPD, ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, दवाइयों और अन्य जांचों के लिए अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। इसे देखते हुए, फैसल मदनी साहब ने श्रीपुर डंगरा में OPD, IPD, USG, X-RAY, PATHOLOGY और PHARMACY जैसी सभी सुविधाएं एक ही जगह पर उपलब्ध कराई हैं। 👉 गरीबों के लिए रहमत : मोहम्मद फैसल मदनी साहब सिर्फ एक हॉस्पिटल डायरेक्टर नहीं, बल्कि गरीबों के मसीहा भी हैं। उनकी सोच यह है कि इलाज सिर्फ अमीरों तक सीमित न रहे, बल्कि हर जरूरतमंद को बेहतरीन इलाज मिले। इसीलिए, "लाइफलाइन हॉस्पिटल" में कम खर्चे में इलाज और जरूरी चिकित्सा सेवाएं दी जाती हैं, ताकि आर्थिक तंगी की वजह से कोई मरीज बिना इलाज के न रहे।
👉 एक नई मिसाल : जहां आजकल मेडिकल फील्ड को एक बिजनेस की तरह देखा जाता है, वहीं मोहम्मद फैसल मदनी साहब ने इसे खिदमत-ए-खल्क का जरिया बना लिया है। उनका यह जज्बा लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है।
👉 अखिर में : लाइफलाइन हॉस्पिटल सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि इंसानियत और सेवा का प्रतीक बन चुका है। मोहम्मद फैसल मदनी साहब की मेहनत और निस्वार्थ सेवा ने इसे खास बना दिया है। अल्लाह उन्हें लंबी उम्र और सेहत अता करे ताकि वे इसी तरह समाज की सेवा करते रहें।
